देखता तू
जानता तू
और नहीं कुछ...लीला है
करता तू
करता नहीं पर
स्याद्वाद है...लीला है
भोगता तू
भोगा नहीं पर
भिन्न भोग है...लीला है
देह तेरी पर
देह नहीं तू
देहातीत है...लीला है
जग में तू
जग नहीं तेरा
तेरा तुझमें सब...लीला है
चारों 'त्व'
तुझमें ही तुझसे
बाहर तो सब...लीला है
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